The Ultimate Guide To Fear Aur Dar Ko Kaise Jeetein – Tantrik Upay & Divya Sadhana



ध्यान से मन की चंचलता कम होती है और अंदर का डर धीरे-धीरे शून्य होने लगता है।

यह डर मेरे जीवन को कैसे प्रभावित कर रहा है?

स्कूलों के लिए आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम

अगर उसी वक़्त उस मुसीबत का सामना कर लिया जाए तो जीवन भर आप उसके डर से मुक्त रहंगे और आपमें एक अलग ही आत्मविश्वास आ जाएगा.

  लाइफस्टाइल से जुड़े हर सवाल का जवाब मिलेगा यहां। iDiva हिंदी है आज की नारी की ऑनलाइन बेस्ट फ्रेंड।  

उसने तो सदा बस उलटे सीधे ही काम किये हैं. इस प्रकार की सोच उसके मष्तिष्क में एक तरह का भय पैदा करती है की अब आगे जब कोई संकट आएगा तो भगवान् भी मेरी मदद नहीं करेंगे. धीरे धीरे ये डर गहरा होता चला जाता है.

जिस वजह से उसके अन्दर से ख़ुशी गायब और तरह तरह के डर पनपने शुरू हो जाते हैं. डर और गलत काम का बहुत ही गहरा सम्बन्ध है. अगर आप कोई भी गलत काम नहीं करते, मेहनत और इमानदारी के साथ जीते हैं तो यकीन मानिए आप हमेशा निर्भीक रहेंगे.

सभी इंसानों में उनके विचार, निर्णय और आदतें छ: मानवीय जरूरतों से प्रभावित रहतीं है। हममें से बहुतों के लिए निश्चित चीजों का होना एक जरूरत है। जब कभी हमारे साथ ऐसा कुछ होने लग जाता है जिसके विषय में हमने कभी सोचा नहीं तो हमें डर लगने लगता है, कुछ अनिश्चित होने का डर ही हमें हमारे कंफर्ट जोन से बाहर निकलने नहीं देता। जिससे हम कभी अपने डर के आगे देख ही नहीं पाते और एक ही जगह फंसे रहते हैं।

ज्यादा डर लगने से होता यह हैं मन में ऐसे विचार और घटनाएं आने लगती हैं, मन ऐसी घटनाओं की कलपना करने लगता हैं जो वास्तव में घटित ही नहीं हुईं होती हैं। यहीं डर लगने का मूल और असली कारण होता हैं अर्थात् डर लगने से आप और डरते हैं।

देखना कुछ ही दिन में आपका मन मष्तिष्क प्रफुल्लित रहना शुरू हो जाएगा और किसी प्रकार की डर की भावना आपके अन्दर से पूरी तरह ख़त्म हो जायेगी.

उम्मीद है कोशिश करने से हर मसले का हल निकल ही जाता है.

आप अपने आप को जैसा चाहे वैसा बनाकर जी सकते हैं. आप चाहें तो हमेशा डरे डरे रहकर जीवन जी सकते हो, या फिर बिलकुल more info निडर होकर बिना किसी चीज़ से डरे.

अक्सर जब कोई डर के विषय में सोच – विचार करता है, अधिकांशत वे शारीरिक खतरे के विषय में सबसे ज्यादा सोचते हैं जैसे – झगड़े के बीच में चोट लगने का डर, गहरी खाई से नीचे गिर जाने का डर, कभी-कभी डर फोबिया में भी बदल जाता है। फोबिया एक खास तरह का डर है जो हमें किसी निश्चित परिस्थिति, वस्तु या जानवर जैसे – मकड़ी, कॉकरोच, स्टेज पर आकर बोलने से लगता है

डर के प्रकार – जानिए कौन-से डर आपको रोकते हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *